sahrad ki punam par jo bhi kadcha jate hai

शरद की पूनम पर जो भी कड़छा जाते हैं ।
गुरूवर टेकचंद जी उनको गले से लगाते हैं ॥

समाधी उत्सव होता है भारी ,
जानती है जिसको दुनिया सारी ।
गुरू यहाँ आशीष बरसाते हैं ॥

फुलो से मंदिर सजता है न्यारा ,
स्वर्ग से सुंदर लगता नजारा ।
जब थोडा सा गुरूवर मुस्काते है ॥

पूनम की आरती का नजारा ,
देखने तरसता जिसे जग सारा ।
गुरूवर जब अमृत बसराते है ॥

भाव से कड़छा धाम जो आता ,
पल भर में उसको सब मिल जाता ।
नवयुवक गुरू मिल जाते हैं ॥

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