sai meri arji bta kaha pe chupaai hai

लाखो की साई बिगड़ी तूने बनाई है,
साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,
लाखो की साई बिगड़ी तूने बनाई है,

कड़वी नीम की मीठी काया सब को बड़ा लुभाती है,
जो भी तेरे दर पे आता उस का भाग जगाती है,
मेरी बारी में क्यों देर लगाई है,
साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,

उधि तेरी बाबा सब के दुःख और रोग मिटाती है,
द्वारका माई में तू ही सब के कष्ट और पाप जलती है,
मैंने भी साई उधि तन पे रमाई है,
साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,

वेंडी पावक शीतल छाया मन शीतल कर जाती है,
नंदा दीपक पावन लोह साई तेरी याद दिलाती है,
मैंने भी तेरे नाम की अलख जगाई है,
साई मेरी अर्जी बता कहा पे छुपाई है,

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