sarv sukh hari sharnaghat jaan

जगत मे देखी झूठी शान
सर्व सुख हरि शरणागत जान

चाहे काशी मथुरा जावो,गंगा करो स्नान
त्रिवेणी तीर्थ मे न्हावो,करलो जतन तमाम

अलख तणो मानव तन मिलियो,अद्भुत रचना जान
खलक बीच मे खरच दियो है,पङी नही पहचान

हाथ पांव सु सुकृत करले,मुख से भजले राम
मन चंचल ने वस मे करले,हो जा तु उपराम

बार-बार तुमको समझावे,शास्त्र वेद पुराण
सदानन्द कहे राम सुमरता,कोङी लागे ना दाम

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