sun meri gora man le kehna la de bhang ka gota re chod de saare kama ne mane peelade bhang ka lota re ‘

सुन मेरी गोरा मान ले केहना ला दे भाँग का गोटा रे,
छोड़ दे सारे कामा ने मने पिलादे भाँग का लोटा रे,

मैं न मानु बात तेरी तेरा रोज का झंझट मोटा रे,
छोड़ के सारे कामा ने मैं चली अपने पीहर ने,

रोज भाँग खुटवावे से कितना मने सतावे से,
हाथ भी सूजे देख भोले पर तने तरस न आवे से,
छोड़ी निगोड़ी भांग भोले छोड़ से मने सताने रे,
छोड़ के सारे कामा ने मैं चली अपने पीहर ने,

अरे गोरा इतना एथे न भांग ने निगोड़ी गोले न,
तेरे हाथ की पिशि भाँग में आवे कितना मजा,
मेरी है कमजोरी भांग इस्पे क्यों इतरावे रे,
छोड़ दे सारे कामा ने मने पिलादे भाँग का लोटा रे,

कर्म फुट गए भोले मेरे जिस दिन से मैं वियाह के आई,
घोट घोट के भाँग तेरी रे मैं तो आधी होती आई,
लाडू पेड़े बर्फी खाले छोड़ दे भाँग का पीना रे,
छोड़ के सारे कामा ने मैं चली अपने पीहर ने,

हाथ जोड़ कर कहु भोले छोड़ दे भाँग का पीना रे,
छोड़ दे अपनी जिद ने गोरा भाँग बिना क्या जीना रे,
अपनी तो दोनों से यारी रही का यो केहना रे,
छोड़ के सारे कामा ने मैं चली अपने पीहर ने,

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