Top 10 Chetawani Bhajan Lyrics

Top 10 Chetawani Bhajan Lyrics

जो बोयेगा वही पायेगा तेरा किया आगे जाएगा

जो बोयेगा वही पायेगा तेरा किया आगे जाएगा
सुख-दुःख है क्या फल कर्मों का
जैसी करनी वैसी भरनी
जो बोयेगा वही पायेगा

सबसे बड़ी पूजा है माता पिता की सेवा
किस्मत वालों को ही मिलता है ये मौक़ा
हाथ से अपने खो मत देना मौक़ा ये खिदमत का
जन्नत का दर खुल जाएगा
तेरा किया आगे जाएगा

चाहे न पूजे मूरत चाहे न तीर्थ जाए
मात पिता के तन में सारे देव समाए
तू इनका दिल खुश रखे तो ईश्वर खुश हो जाए
भगवान तुझको मिल जाएगा
तेरा किया आगे जाएगा

अपनों को जो अपनी दुनिया ठुकराती है
जाने अनजाने में हाय निकल जाती है
हाय लगे ना तुझको दुआ ये माँ देकर जाती है
माँ का दिल माफ़ कर जाएगा
तेरा किया आगे जाएगा

https://www.youtube.com/watch?v=6v8Lrhqti4Q

मन धीर धरो, घबराओ नहीं,

मन धीर धरो, घबराओ नहीं,
भगवान मिलेंगे, कभी न कभी -2
मन धीर धरो…

फूलों में नहीं, कलियों में नहीं,
काँटों में मिलेंगे, कभी न कभीं, मन धीर धरो…

सूरज में नहीं, चंदा में नहीं,
तारों में मिलेंगे, कभी न कभी, मन धीर धरो…

गंगा में नहीं, यमुना में नहीं,
सरयू में मिलेंगे, कभी न कभी, मन धीर धरो…

बागों में नहीं, खलियानो में नहीं,
जंगल में मिलेंगे, कभी न कभी, मन धीर धरो…

मंदिर में नहीं, मस्जिद में नहीं,
गुरद्वारे में मिलेंगे, कभी न कभी, मन धीर धरो…

मथुरा में नहीं, गोकुल में नहीं,
मेरे मन में मिलेंगे, कभी न कभी, मन धीर धरो…

जाग रे नर जाग दीवाना

जाग रे नर जाग दीवाना,
अब तो मूरख जाग रे ।
काँहि सूतो घन घोर नींद में,
उठ भजन में लाग रे ।

ध्रुव जी जाग प्रहलाद जी जागा,
जैसे बन्दा जाग रे ।
ध्रुव जी ने मिलगी असल फकीरी,
प्रहलादे ने राज रे ।
जाग रे नर।

गोरख जाग मच्छेन्दर जागा,
जैसे मूरख जाग रे ।
वां रो चेलो भरतरी जागो,
नगर उज्जैनी त्याग रे ।
जाग रे नर।

के कोई जागे रोगी भोगी,
के कोई जागे चोर रे ।
कोई जागे भगत राम रो,
लागी राम सूं डोर रे ॥
जाग रे नर।

तन सहारा भाई मन कारणां,
दो दिन का विश्राम रे ।
तन का चोला जद होया पुराणा,
लागा दान पर दाग रे ॥
जाग रे नर।

मीरां केवे प्रभु ऐसी जागी,
राम नाम रंग लाग रे ।
सतगुरु झेल दया कर दीनी,
जनम मरण भय भाग रे ।
जाग रे नर।

माया कोणी चले सागे रे,

टेर : माया कोणी चले सागे रे,
दया धर्म पुण्यदान भजन कर मिलसी आगे रे।
पिछले जन्म में करी कमाई लगा रहा घर में ठाट,
बिना भजन जो आये जगत में रहे है विपदा काट।
माया कोणी…..
मात पिता की सेवा कर ले, नित उठ ले आशीष,
घर आँगन में मौज मनाओ सत्य है बिसवा बीस।
माया कोणी…..
सास ससुर की सेवा करले नित उठ पावा लाग,
ले आशीष बड़ो की बेटा बना रहे तेरा भाग।
माया कोणी…..
नेम धर्म जप तप तूं करियो अपने पति के संग,
दया धर्म की करियो कमाई हाथ न होशी तंग।
माया कोणी…..
घर आंगन में ख़ुशी रहेगी होसी मौज बहार,
अन्नक्षेत्र श्रीराम मंदिर के भजनो का है सार।
माया कोणी…..

घणा दिन सो लियो रे अब तो जाग मुसाफिर जाग।

दोहा : कबीरा सुता क्या करें जागन जपे मुरार।
एक दिन तो है सोवना लम्बे पाँव पसार।।
टेर : घणा दिन सो लियो रे अब तो जाग मुसाफिर जाग।
पहले सोयो माता के गर्भ में उल्टा पांव पसार।
भीतर से जब बाहर आया भूल्या कोल करार।।
जन्म तेरी हो लियो रे

दूजा सोया गोद माता के सुख से जग में आय।
बहन भुआ बस लाड़ लड़ावे हो रहा मंगला चार।।
लाड़ तेरो हो लियो रे

तीजो सोयो त्रिया सेज पर गल में बहियां डार।
किया भोग-रोग से दुखिया तन गया बेकार।।
बिवाह तेरो हो लियो रे

चोथो सोयो जा समसाणा लम्बे पांव पसार।
कहत कबीर सुणो भाई साधो ऐ साये संसार।
मरण तेरो हो लियो रे

बैठ अकेला दो घडी, कभी ईश्वर तो ध्याया कर

बैठ अकेला दो घडी, कभी ईश्वर तो ध्याया कर,
मन मंदिर में गाफ़िला, तूं झाड़ू रोज लगाया कर।
सोने में तो रेन गंवाई, दिन भर करता पाप रहा
मोह माया में फंस कर बन्दे, धोखे में तूँ आप रहा
सुबह सवेरे उठ प्रेमिया, सत्संग में नित आया कर
मन मंदिर में…
बारम्बार जन्म का पाना, बच्चों का खेल नहीं
पूर्व जन्म के सतकर्मों का, जब तक होता मेल नहीं
मुक्ति पद पाने के लिए, तू उत्तम कर्म कमाया कर
मन मंदिर में…
पास तेरे हो दुखिया कोई, तूने मौज उड़ाई क्या
भूखा प्यासा पड़ा पड़ोसी, तूने रोटी खाई क्या
पहले सबसे पूछ उन्हें, तूँ पीछे रोटी खाया कर
मन मंदिर में..

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं,
बाद आंसू बहाने से क्या फायदा

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा

मै तो मंदिर गया, पूजा-आरती की,
पूजा करते हुए ये ख्याल आ गया – 2
कभी माँ बाप की सेवा की ही नहीं,
सिर्फ पूजा के करने से क्या फायदा

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा

मै तो सत्संग गया गुरुवाणी सूनी
गुरुवाणी को सुनकर ख्याल आ गया – 2
जन्म मानव का लेके दया न करी
फिर मानव कहलाने से क्या फायदा

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा

मैंने दान किया मैंने जपतप किया,
दान करते हुए ये ख्याल आ गया – 2
कभी भूखे को भोजन खिलाया नहीं,
दान लाखो का करने से क्या फायदा

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा

गंगा नहाने हरिद्वार काशी गया,
गंगा नहाते ही मन में ख्याल आ गया – 2
तन को धोया मगर मन को धोया नहीं,
फिर गंगा नहाने से क्या फायदा

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
बाद अमृत पिलाने से क्या फ़ायदा

मैंने वेद पढ़े मैंने शास्त्र पढ़े,
शास्त्र पढ़ते हुए ये ख्याल आ गया – 2
मैंने ज्ञान किसी को बांटा नहीं,
फिर ज्ञानी कहलाने से क्या फायदा

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं
बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा

मात पिता के ही चरणों में चारोधाम है,
आजा आजा यही मुक्ति का धाम है – 2
पिता माता की सेवा की ही नहीं,
फिर तीर्थो में जाने से क्या फायदा

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं,
बाद अमृत पिलाने से क्या फ़ायदा
कभी गिरते हुए को उठाया नहीं,
बाद आंसू बहाने से क्या फायदा

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