रानी नागफनी की कहानी- 2-हरिशंकर परसाई

रानी नागफनी की कहानी- 2-हरिशंकर परसाई

व्यंगात्मक उपन्यास- रानी नागफनी की कहानी- 2 -हरिशंकर परसाई होना बीमार और लगना पेनिसिलिन अस्तभान अब रात-दिन नागफनी के चित्रों को देखता रहता और ‘हाय ! हाय !’ करता रहता । प्रेम की पीड़ा से आठों पहर तड़पता रहता। उसकी यह हालत देखकर मुफतलाल घबड़ाया और एक नामी डॉक्टर को बुला लाया । डॉक्टर स्टेथिस्कोप … Read more

रानी नागफनी की कहानी -हरिशंकर परसाई

रानी नागफनी की कहानी -हरिशंकर परसाई

व्यंगात्मक उपन्यास- रानी नागफनी की कहानी -हरिशंकर परसाई यह एक व्यंग्य कथा है। ‘फेंटजी’ के माध्यम से मैंने आज की वास्तविकता के कुछ पहलुओं की आलोचना की है। ‘फेंटेजी’ का माध्यम कुछ सुविधाओं के कारण चुना है। लोक-मानस से परंपरागत संगति के कारण ‘फेंटेजी’ की व्यंजना प्रभावकारी होती है इसमें स्वतंत्रता भी काफी होती है … Read more

ज्वाला और जल – हरिशंकर परसाई

ज्वाला और जल – हरिशंकर परसाई

उपन्यासिका- ज्वाला और जल – हरिशंकर परसाई (ज्वाला और जल हरिशंकर परसाई की आरम्भिक रचनाओं में से एक है जिसके केन्द्र में एक ऐसा युवक है जो समाज के निर्मम धपेड़ों से धीरे धीरे एक अमानवीय अस्तित्व के रूप में परिवर्तित हो जाता है। पर प्रेम और सहानुभूति के सानिध्य में वह एक बार फिर … Read more

जेलब्रेक-कहानी- हरीश जायसवाल

जेलब्रेक-कहानी- हरीश जायसवाल

जेलब्रेक-कहानी- हरीश जायसवाल ‘देखो अपनी हरकतों से बाज आओ वर्ना एक एक की हड्डी पसली तोड़ दूंगा।’जेलर योजक सिन्हा अपने ऑफिस में उन चारों कैदियों को धमकाते हुए कह रहा था। ‘परन्तु सर हमने काम करने से मना कब किया?’ उन मे से एक कैदी सागर पूछ बैठा। ‘हम चाहते है हमें काम हमारी योग्यता … Read more

लच्छो की बहादुरी – हंसराज रहबर (लोक कथा)

लच्छो की बहादुरी – हंसराज रहबर (लोक कथा)

लच्छो की बहादुरी – हंसराज रहबर (लोक कथा) किसी गाँव में एक लड़की रहती थी, जिसका नाम था लच्छो। एक दिन वह अपनी सखियों के साथ कुएं पर पानी भरने गई। वहाँ सब लड़कियां अपने सगाई-व्याह की बातें कर रही थीं। एक सहेली जिसका नाम बन्तो था, बोली-‘‘मेरे पिता ने मेरे ब्याह के लिए कीमती … Read more

गडोलना – हंसराज रहबर (कहानी)

गडोलना – हंसराज रहबर  (कहानी)

गडोलना – हंसराज रहबर (कहानी) गडोलना चौखट के करीब खूंटी पर लटक रहा था और विजय इधर-उधर दौड़ता फिरता था । उसकी दृष्टि गडोलने पर जा पड़ी और वह उसे उतारने के लिए जिद करने लगा । एक महीने पहले जब उसने गडोलना छोड़ कर बिना किसी सहारे के अपने आप आगे डग भरा था, … Read more

सुनहरा अखरोट -हंसराज रहबर (परी कथा)

सुनहरा अखरोट -हंसराज रहबर (परी कथा)

सुनहरा अखरोट -हंसराज रहबर (परी कथा) बहुत दिनों की बात है। किसी गाँव में एक लोहार और उसकी पत्नी रहते थे। उन्हें धन-दौलत किसी चीज की कमी नहीं थी। दुख सिर्फ यह था कि इनके कोई सन्तान नहीं थी। एक रात लोहार की पत्नी ने सपना देखा। उसे एक घने जंगल में एक पेड़ दिखाई … Read more

हवा बंद क्यूँ है?- हसन मंज़र (कहानी)

हवा बंद क्यूँ है?-  हसन मंज़र (कहानी)

हवा बंद क्यूँ है?- हसन मंज़र (कहानी) पहली बार जब पहरे वाला सिपाही सलाख़ों के बाहर से गुज़रा तो अहमद को वो ख़याल आया। दूसरी दफ़ा वो उसे आवाज़ देने को हुआ और होंट खोल कर रह गया। उसके बाद सिपाही ने मुतवातिर कई फेरे किए, लेकिन अहमद किसी फ़ैसले पर न पहुंच सका। बिलआख़िर … Read more

सवाब का रिश्ता – हसन मंज़र (कहानी)

सवाब का रिश्ता –  हसन मंज़र  (कहानी)

सवाब का रिश्ता – हसन मंज़र (कहानी) “कभी-कभी मैं सोचती हूँ अजीब नाम है तुम्हारा।” लड़की ने कहा। “वह कैसे?” “तलत तो लड़कियों का नाम होता है!” दोनों हँस पड़े। फिर अचानक संजीदा होते हुए नौजवान ने कहा, “और तुम्हारा कौन-सा लड़कियों जैसा है?” लड़की ने भी एकदम संजीदा होते हुए कहा, “वह कैसे?” “वह … Read more

चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी)

चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी)

चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी) ताजमहल होटल के सामने से पहले भी कभी.कभार गुज़रा हूँ। लकड़ी के भद्दे से केबिन और सीमेंट के ठड़े वाली चाय की दुकान पर “ताज-महल होटल” का बोर्ड देखकर मुस्कुराया भी हूँ। लेकिन पिछले दो महीने से ये होटल मेरी ज़िंदगी के नए रास्ते का एक अहम … Read more