मुहब्बत और.. हाजरा मसरूर . (कहानी)
मुहब्बत और.. हाजरा मसरूर . (कहानी) बाहर ख़ूब ज़ोर-शोर से आँधी चल रही थी। लैम्प की मद्धम सी रौशनी में कमरा ख़ौफ़नाक मा’लूम हो रहा था। माँ आहिस्ता-आहिस्ता क़दम उठाती बंद दरवाज़े की तरफ़ बढ़ी लेकिन अचानक पलट कर लैम्प की बत्ती ऊँची कर दी। “मेरी बच्ची, मेरा तो कलेजा फटा जा रहा है… तुम … Read more