गिरगिट के रंग-कहानी- हिमांशु जोशी

गिरगिट के रंग-कहानी- हिमांशु जोशी

गिरगिट के रंग-कहानी- हिमांशु जोशी आज फिर दीये जले। इनके जलते ही न जाने क्यों रक्त जमने लगता है! साँस रुक-सी आती है। रोम-रोम काँप उठता है। आँखों के आगे अंधकार छा जाता है। फिर कुछ भी नहीं सूझता। कुछ भी नहीं दीखता। भगवान्! या तो ये दीये न जला या यह जीवन-दीप ही एक … Read more

आधा दिन : आधी रात -कहानी-हिमांशु जोशी

आधा दिन : आधी रात -कहानी-हिमांशु जोशी

आधा दिन : आधी रात -कहानी-हिमांशु जोशी हमेशा की तरह सुबह वह जागी। द्वार खोला। देखा—हिम पिघल चुका है अब। पाले की तह धरती पर बिछी है, सफेद झीनी चादर की तरह। बर्फ केवल दूर ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों या आसपास की ठंडी घाटियों में ही शेष रह गई है। दिन अभी निकला नहीं। वह अपनी धोती … Read more

तुम्हारे शहर में -कहानी-हिमांशु जोशी

तुम्हारे शहर में -कहानी-हिमांशु जोशी

तुम्हारे शहर में -कहानी-हिमांशु जोशी तुम्हारे इस शहर में सदियों से तंद्रा में डूब यानी जादुई शहर में जब-जब आता हूँ, आँखें कुछ खोजने सी क्यों लगती हैं? खोई-खोई सी उन आँखों में गहरी जिज्ञासा का सा भाव क्यों उभरता है? क्यों यहाँ की बयार में एक प्रकार की चाँदनी, सुगंध का सा अहसास होता … Read more

समिधा-कहानी-हिमांशु जोशी

समिधा-कहानी-हिमांशु जोशी

समिधा-कहानी-हिमांशु जोशी “हाँ,भूला भी। भटका भी। जानबूझकर। दूसरों को राह दिखलाने से पहले स्वयं भी तो पथहीन होना पड़ा।” एक गहरी निःश्वास निकली। देर तक उन दूर रखे सुरा के कुछ रीते, कुछ छलकते प्यालों पर दृ‌ष्टि गड़ी रही। अन्यमनस्क भाव से फिर कहा, “देखती हो गणिके, मदिरा के सागर और यौवन की आँधी में … Read more

संगीतकार जेनको -पोलिश कहानी-हेनरिक सेनकीविच

संगीतकार जेनको -पोलिश कहानी-हेनरिक सेनकीविच

संगीतकार जेनको -पोलिश कहानी-हेनरिक सेनकीविच दुनिया में वह पतला-दुबला आया था। चारपाई के इर्दगिर्द खड़े पड़ोसियों ने माँ और बच्चे को देखकर अपने सिर हिलाए। उन सबमें से अधिक अनुभवी—लोहार की पत्नी ने अपने ढंग से बीमार जच्चे को सांत्वना देनी शुरू कर दी। ‘‘तुम आराम से लेटी रहो,’’ उसने कहा, ‘‘और मैं पवित्र मोमबत्ती … Read more

पॉकेट बुक -कहानी- हेनरी लैवडेन

पॉकेट बुक -कहानी- हेनरी लैवडेन

पॉकेट बुक -कहानी- हेनरी लैवडेन मोशिया करवेऊ चूहे की तरह ऑफ़िस से बाहर आया जब वह बाहर आ रहा था तो उससे उसके कई मित्रों ने छिपकर जाने को कहा था। उसने लगभग तीन फ्रेंक खो दिए थे। अब वह जल्द ही घर पहुँचना चाहता था। रास्ते में उसे एक आदमी ने यह ख़बर दी … Read more

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -4

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -4

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -4 35. नरक-स्थली बड़े ही दुर्गम और बीहड़ रास्‍ते से एक गाड़ी चली आ रही है। उसके पीछे-पीछे टॉम और कई गुलाम बड़ी कठिनाई से मार्ग पार कर रहे हैं। गाड़ी के अंदर हजरत लेग्री साहब बैठे हुए हैं। पीछे की ओर माल-असबाब … Read more

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -3

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -3

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -3   25. पुष्पी की कुम्हालाहट दिनों के बाद महीने और महीनों के बाद वर्ष, देखते-देखते सेंटक्‍लेयर के यहाँ टॉम के दो वर्ष यों ही बीत गए। टॉम ने अपने घर जो पत्र भेजा था, कुछ ही दिनों बाद उसके उत्तर में मास्‍टर … Read more

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -2 

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -2 

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार -2 16. टॉम का नया मालिक यहाँ से टॉम के जीवन के इतिहास के साथ और भी कई व्‍यक्तियों का संबंध आरंभ होता है। अत: उन लोगों का कुछ परिचय देना आवश्‍यक है। अगस्टिन सेंटक्‍लेयर के पिता लुसियाना के एक रईस और जमींदार … Read more

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार

टॉम काका की कुटिया-उपन्यास- हैरियट बीचर स्टो अनुवाद – हनुमान प्रसाद पोद्दार   1. गुलामों की दुर्दशा माघ का महीना है। दिन ढल चुका है। केंटाकी प्रदेश के किसी नगर के एक मकान में भोजन के उपरांत दो भलेमानस पास-पास बैठे हुए किसी वाद-विवाद में लीन हो रहे थे। कहने को दोनों ही भलेमानस कहे … Read more