सर्व भयानक रोग नाशक मंत्र (Sarv Bhayanak Rog Nashak Mantra
उद्भूत-भीषण-जलोदर-भार-भुग्नाः,
शोच्यां दशा-मुपगताश्-च्युत-जीविताशाः ।
त्वत्पाद-पंकज-रजो-मृत-दिग्ध-देहाः,
मर्त्या भवन्ति मकर-ध्वज-तुल्य-रूपाः ॥
हिन्दी भावार्थ:
उत्पन्न हुए भीषण जलोदर रोग के भार से झुके हुए, शोभनीय अवस्था को प्राप्त और नहीं रही है जीवन की आशा जिनके, ऐसे मनुष्य आपके चरण कमलों की रज रुप अम्रत से लिप्त शरीर होते हुए कामदेव के समान रुप वाले हो जाते हैं।
मंत्र: रोग-व्याधि सभी दूर करने हेतु | रोग-उन्मूलन मंत्र
मंत्र जैन समाज के प्रसिद्ध भक्तामर स्तोत्र का 45वाँ मंत्र