चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी)

चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी)

चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी) ताजमहल होटल के सामने से पहले भी कभी.कभार गुज़रा हूँ। लकड़ी के भद्दे से केबिन और सीमेंट के ठड़े वाली चाय की दुकान पर “ताज-महल होटल” का बोर्ड देखकर मुस्कुराया भी हूँ। लेकिन पिछले दो महीने से ये होटल मेरी ज़िंदगी के नए रास्ते का एक अहम … Read more

फ़ासले- हाजरा मसरूर (कहानी)

फ़ासले- हाजरा मसरूर  (कहानी)

फ़ासले- हाजरा मसरूर (कहानी) नानी को ऐ’न वक़्त पर नानीपने की सूझ रही थी… “भला चक़माक़ पत्थर में रगड़ लगे और चिंगारी न गिरे?”, नानी दरवाज़े के पास अड़ कर बोलीं और सितारा का जी चाहा कि अपना सर पीट ले। “चक़माक़! चक़माक़ यहाँ कहाँ से टपक पड़ा?”, सितारा ने बड़े ज़ब्त के साथ सवाल … Read more

कनीज़ – हाजरा मसरूर (कहानी)

कनीज़ – हाजरा मसरूर (कहानी)

कनीज़ – हाजरा मसरूर (कहानी) सिविल लाईन्ज़ की सबसे कुशादा और सबसे ख़ूबसूरत सड़क पर मील डेढ़ मील की मुसाफ़त से थकी हुई कनीज़ और उनकी दादी सटर-पटर जूतियाँ घिसटती चली आ रही थीं। दादी की चादर लू में फड़फड़ा रही थी। कनीज़ का पुराना काला बुर्क़ा तो हवा के ज़ोर से कई बार सर … Read more

बन्दर का घाव – हाजरा मसरूर (कहानी)

बन्दर का घाव – हाजरा मसरूर (कहानी)

बन्दर का घाव – हाजरा मसरूर (कहानी) वो बरामदे में झिलंगी खाट पर नई दुल्हन की तरह गठरी बनी पड़ी थी। गर्मी की भरी दोपहर, उस पर ठैरा हुआ बुख़ार… जी बौलाया जा रहा था। कमरे में घर के सब अफ़राद दरवाज़े बंद किए आराम से हँस बोल रहे थे। कई बार उसका जी चाहा … Read more

भालू – हाजरा मसरूर (कहानी)

भालू – हाजरा मसरूर (कहानी)

भालू – हाजरा मसरूर (कहानी) आज जुमेरात थी। अभी चराग़ भी न जले थे। अल्लाह रखी गुलाबी छींट का लहँगा और महीन मलमल का कुरता पहने और सर पर हरा दुपट्टा हज्जनों की तरह लपेटे, आज भी स्लीपरें घसीटती दरगाह में हाज़िरी देने निकली लेकिन ऐसी बेताबी से कि अनवरी उसकी तेज़ी का साथ न … Read more

कमीनी – हाजरा मसरूर (कहानी)

कमीनी – हाजरा मसरूर (कहानी)

कमीनी – हाजरा मसरूर (कहानी) शाम के बढ़ते हुए अंधेरे में… “निकल हरामज़ादी… निकल तू कमीनी…” भारी और करारी आवाज़ों के साथ साथ शर्म-ओ-हया के बोझ से दबी हुई महीन महीन आवाज़ें इसी एक जुमले को ऊंचे-नीचे सुरों में रटते रटते भयानक हो गईं। घर के अंदर से इस जुमले के अलावा धमक धय्या का … Read more

मुहब्बत और.. हाजरा मसरूर . (कहानी)

मुहब्बत और.. हाजरा मसरूर . (कहानी)

मुहब्बत और.. हाजरा मसरूर . (कहानी)  बाहर ख़ूब ज़ोर-शोर से आँधी चल रही थी। लैम्प की मद्धम सी रौशनी में कमरा ख़ौफ़नाक मा’लूम हो रहा था। माँ आहिस्ता-आहिस्ता क़दम उठाती बंद दरवाज़े की तरफ़ बढ़ी लेकिन अचानक पलट कर लैम्प की बत्ती ऊँची कर दी। “मेरी बच्ची, मेरा तो कलेजा फटा जा रहा है… तुम … Read more

औरत -हाजरा मसरूर (कहानी)

औरत -हाजरा मसरूर (कहानी)

औरत -हाजरा मसरूर (कहानी) “तसद्दुक़ भाई! ये कंघी से ना-आश्ना बिखरे हुए बाल, ये कसीफ़ पोशाक और ये बढ़ा हुआ ख़त, मैं पूछती हूँ आपको क्या हो गया है?”, क़ुदसिया ने तसद्दुक़ को हैरत से देखते हुए कहा। जो एक मुद्दत के बा’द उसके सामने था। “क़ुदसी! अंजान न बनो। मैं अपने मुज़्तरिब दिल को … Read more

भागभरी -हाजरा मसरूर (कहानी)

भागभरी -हाजरा मसरूर (कहानी)

भागभरी -हाजरा मसरूर (कहानी) यह उन दिनों की बात है जब मैंने नयी-नयी प्रैक्टिस शुरू की थी। मेडिकल कॉलेज के ज़माने में मैंने अपनेआप पर रुपयों की कैसी-कैसी बारिश होते न देखी थी। अपने बड़े-बड़े प्रोफ़ेसरों की लम्बी-लम्बी कारें देख आदमी और सोच भी क्या सकता था। मगर जब डिग्री लेकर इस बाज़ार में आयी, … Read more