चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी)
चाँद की दूसरी तरफ़ – हाजरा मसरूर (कहानी) ताजमहल होटल के सामने से पहले भी कभी.कभार गुज़रा हूँ। लकड़ी के भद्दे से केबिन और सीमेंट के ठड़े वाली चाय की दुकान पर “ताज-महल होटल” का बोर्ड देखकर मुस्कुराया भी हूँ। लेकिन पिछले दो महीने से ये होटल मेरी ज़िंदगी के नए रास्ते का एक अहम … Read more