main banjaara shyam ka ghumu desh pardesh

मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश
मेरे साथ साथ में हर दम चलता है खाटू नरेश

इक झोला कंधे पे जिस में श्याम भजन की पोथी है
इस पोथी में श्याम नाम के कितने हीरे मोती है
जब श्याम दीवाने मिलते उन्हें करता हु मैं पे
मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

आज याहा कल वाहा ठिकाना इस नगरी कभी उस नगरी,
जाऊ याहा वही मिलती है श्याम की बगियाँ हरी भरी
जो श्याम शरण में रेहते उन्हें कोई नही कलेश
मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

नित नया दरबार लगा कर मिलता श्याम सलोना है
नए नए रूपों में मुज्पे करता जादू टोना है
मुझको दर्शन देता है मुझको बदल बदल के वेश
मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

जीवन में रंग बरने वाले कारीगर को क्या दू मैं,
दिल भी इसका जान भी इसकी इसके लिए क्या त्यागु मैं
बीनू पर दृष्टि दया की ये रखता नित हमेश
मैं बंजारा श्याम का घुमु देश परदेश

खाटू श्याम भजन

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