शुक्रवार भक्ति भजन – सर्व मंगल मांगल्ये, ॐ भूर्भुवः स्वः, या देवी सर्व भूतेषु , दुर्गा चालीसा ,आरती

शुक्रवार भक्ति भजन – सर्व मंगल मांगल्ये, ॐ भूर्भुवः स्वः, या देवी सर्व भूतेषु , दुर्गा चालीसा ,आरती Ambey Bhakti


दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवी, शक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञानता रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली, ममतामई, मोक्ष प्रदायनी तथा कल्याणकारी हैं। उनके बारे में मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म पर आघात करने वाली राक्षसी शक्तियों का विनाश करतीं हैं।

Durga ( दुर्गा ) is a major Hindu goddess, worshipped as a principal aspect of the mother goddess Mahadevi. She is associated with protection, strength, motherhood, destruction, and wars.

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00:01 Sarv Mangal Mangliye
17:19 Om Bhur Bhuvah Swaha
29:35 Ya Devi Sarv bhuteshu
39:23 Durga Chalisa
47:20 Santoshi Mata Katha
1:02:01 Jai Santoshi Mata
1:10:07 Ambey Tu Hai Jagdambe Kali
1:16:28 Jai Ambey Gauri

Label – Ambey
Digital Work – Vianet Media
Parent Label – Shubham Audio Video
133-DVT_JKB

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bhajan mata ke शिवा मंगल मंगल ये शिव सर्वार्थ साधिके शरण में त्रियंभ के गौरी नारायणी नमोस्तुते [संगीत] मंगल पूर्ण करने वाली [संगीत] [संगीत] अर्थात कामनाओं को भून करने वाली [संगीत] तथा तीन नेत्रों वाली गौरांडी सृष्टि की पालनहार शक्ति है ऐसी नारायणी को हमारा नमस्कार है [संगीत] गोरी नारायणी नमो सुचारू मंगल मंगलकारी नारायण [संगीत]

के गौरी नारायण [संगीत] [संगीत] शरण्या त्रयंबक गौरी नारायण [संगीत] [संगीत] के गौरी नारायण [संगीत] शारंग के गौरी नारायणी नमोस्तुते सर्व मंगल मंगलम शिवा सर्वप्रथम साथ गए शरण में गए नारायण नमोस्तुते [संगीत] मंगल शिवा शंकर [संगीत] साड़ी नारायण [संगीत] [संगीत] शारंग रंग के गौरी नारायणी नमो सुख मंगल मंगल

शिवा सर्व साध के शरण में नारायण [संगीत] [संगीत] नारायण नारायण [संगीत] शरण ब्रह्म के गौरी नारायणी नमो सेंट मंगल मंगल नारायण नारायण [संगीत] शरण ब्रह्म के गौरी नारायण [संगीत] [संगीत] [संगीत] शारंगी रंग के गौरी नारायणी नमोस्तुते सर्व मंगल मंगल शिवा सर्व साध के शरण में कम है नारायण नारायण [संगीत] शरण

निर्मोस्ट्यूट सर्व मंगल मंगल नारायण नारायण [संगीत] [संगीत] शरण में ब्रह्म के गौरी नारायणी नमोस्तुते सर्व मंगल मंगल नारायण नारायण [संगीत] [संगीत] मंगल मंगलय शिव सर्वार्थ साधिके शरण में त्रयंबक हरी नारायण [संगीत] शरण निर्गुणी नारायण [संगीत] [संगीत] [संगीत] नारायण नारायण [संगीत] मंगल मंगलय शिव सरवत साधु शरण प्रभु के गौरी नारायण [संगीत] [संगीत]

शरण में रंग के गौरी नारायणी नायमोस्ट पे सर्व मंगल मंगलकारी नारायण शिवा [संगीत] के गौरी नारायण [संगीत] [संगीत] शिव सर्वार्थ साधिके शरण नियंत्रियों के हरी नारायण [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा [संगीत] जो जो ना प्रचोदयात् [संगीत] तूने हमें उत्पन्न किया पालनपुर कर रहा है तू [संगीत] तुझे ही बातें प्राण हम

दुखियों के कष्ट हारता हेतु छाया हुआ सभी जगह तेरा तेज है महान सृष्टि की वास्तु वास्तु में तू हो रहा है विद्यमान तेरा ही धरते ध्यान हम मानते तेरी दया ईश्वर हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ मार्ग पर चला परमात्मा सर रक्षक सर्वव्यापक और सर्वधर है वह परमात्मा प्राणों का प्राण होने से प्रांत प्रिया

हम सर जगत के उत्पादक सर प्रेरक सकल ऐश्वर्या संपन्न को आनंद कामना करने योग्य परमात्मा के उसे वर्ण करने योग्य स्वरूप का तेज स्वरूप का ध्यान करते हैं उसे अपनी बुद्धि और हृदय में धरण करते हैं धरण किया हुआ वह सविता देव हमारी बुद्धि और कर्मों को सन्मार्ग में प्रेरित करें जो दया

ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देव ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवासी धीमहि [संगीत] भर्गो देवासी धीमहि दियो जो एन [संगीत] प्रचोदयात् [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् [संगीत] भर भुवनेश्वर तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवस्यम जियो यूं ना प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं

भर्गो देवासी धीमहि दियो जो एन प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा [संगीत] प्रचोदयात् [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् [संगीत] हो गया [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् [संगीत] [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवासी धीमहि दियो जो एन प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा [संगीत] तत्सवितुर्वरेंयं

भर्गो देवासी धीमहि दियो जो एन प्रचोदयात् [संगीत] [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् [संगीत] भर भुवनेश्वर [संगीत] तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवासी माहे [संगीत] प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवासी धीमहि दियो जो एन प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा [संगीत] [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो

देवस्यम्हीं दियो जो एन प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवासी धीमहि दियो जो एन प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा [संगीत] तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवासी धीमहि जो जो एन प्रचोदयात् [संगीत] ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् [संगीत] भर बुवा स्वाहा [संगीत] तत्सवितुर्वरेंयं भर्गो देवस्यम जिओ जो एन प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा तत्सवितुर्वरेंयं

भर्गो देवासी धीमहि दियो जो एन प्रचोदयात् ओम भर बुवा स्वाहा प्रचोदयात् [संगीत] [संगीत] या देवी सर्वभूतेषु या देवी सर्वभूतेष भी तय रूपम जा देवी सर्वभूतेषु भी प्यार में [संगीत] तरसे नमो नमः आदि सर्वभूत विद्या रूप [संगीत] [संगीत] यादें भी सर्वभूतेषु मंत्र रूपेण सीता नमस्ते नमस्ते [संगीत] [संगीत] [संगीत] नमस्ते नमस्ते नमस्ते [संगीत] [संगीत]

[प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण सन सीता [संगीत] नमस्ते नमस्ते [संगीत] [संगीत] [संगीत] या देवी सर्वभूतेषु दया रूप सीता यादें भी सर्वभूतेषु दयालु पेड़ सन सीता नमस्ते नमस्ते [संगीत] [संगीत] कृष्णा कृष्णा [संगीत] [संगीत] [संगीत] मो नमः [संगीत] [संगीत] या फिर से वो देश शांति रूप याद होते [संगीत] [संगीत] [संगीत] ए

यादें भी सर्वप्रथम से नमस्ते [संगीत] [संगीत] [संगीत] नमस्ते [संगीत] नमस्ते नमस्ते नमो नमः या देवी सर्वभूति शून्य देवी सर्वभूतेषु श्रद्धालु प्रेम सत्य देवी सर्वभूतेष [संगीत] अंबे मां जगदंबे मां अंबे मां जगदंबे मां नमो नमो दुर्गे सुख करनी नमो नमो अंबे दुख हरनी निरंकार है ज्योति तुम्हारी पीहू लोग पहले उजियारी शशि लाल

सुख पाव अंबे मां जगदंबे मां [प्रशंसा] सर शक्ति लेकर सुंदरी वाला प्रलय सपना सिंह री तुम्हें गौरी शिवा शंकर प्यारी शिवयोग तुम्हारे गन गावत ब्रह्मा विष्णु तुम नीत जावे जगदंबे मां अंबे मां जगदंबे मां [संगीत] रूप सरस्वती को तुम धारा बेसुबिसी मुबारक अंबा रक्षा कर पहलाद विचारों फिरों मुझको वंदे मां अंबे मां

जगदंबे मां क्रिश दिन में करते विलास दया सिंधु दी के मां आशा हिंगलाज में तुम ही भवानी महिमा भुवनेश्वर बदला सुखदाता श्री भैरव तारा जगतारण चिन्ह बाल भवन अंबे मां जगदंबे मां [संगीत] के विवाह [संगीत] अंबे मां जगदंबे मां [संगीत] तुम तब तक वंदे मां अंबे मां जगदंबे मां [संगीत]

अमरपुरी और सब लोग जैसी जावे दुखदाई ट्रेन निकट नहीं आवे त्यावे तुम्हें चुनार मां लाई जन्म मरांता तो छठ जय हो जगदंबे मां जगदंबे मां [संगीत] जोगी तुम्हारी शंकर आचार्य टपकी लोफर क्रोध जीते सब लियो शंकर को कहो कल नहीं सुमिरो तुम को शक्ति

रूप को मर्म ना पे शक्ति गई तब मां पछतायो अंबे मां जगदंबे मां [संगीत] शरणागत हुई कीर्ति बखान जय जय जगदंबा भवानी मैं प्रश्न आदि जगदंबा दी शक्ति नहीं तीन विलंब मो को मातु कश्ती जीरो तुम बिन कौन हरे दुख में रुक तृष्णा निपट सतावे रिपु मूर्ख मो एट डर पाव अंबे मां

जगदंबे मां [संगीत] [प्रशंसा] शत्रु नस की जय महारानी सुमिरो एक चित तुम्हें भवानी करो कृपा है मां तू दयाल रितिक रोशन सब सुख भोग परम पद पाव देवी दास शरण निज जानी करो कृपा जगदंबा भवानी [संगीत] [संगीत] अंबे मां [संगीत] जय संतोषी मां का श्रीमान बोलिए

भक्तों लीजिए फिर से पवन शुक्रवार ए गया है मेरी मैया संतोषी का प्रिया शुक्रवार भक्तों पवन शुक्रवार के दिवस जो नई मां संतोषी का व्रत उपवास रखती है सर दिन मां के नाम का ध्यान धरती है और साइन कल संतोषी व्रत कथा श्रवण कर आरती चालीसा का

पठानकर मौत को गुड चैन का भोग अर्पित करती है और स्वयं भी केवल एक समय भजन ग्रहण करती है वह नई जीवन में समस्त सुख भोटी है तथा सदा सुहागन रहते हुए अपने जीवन के अंत में मां संतोषी के चरणों में स्थान प्राप्त करती है तो आई सुनते हैं मां

संतोषी की पवन संगीत में व्रत कथा एक बार फिर बोलिए खाद भवानी या संतोषी की पवन संतोषी व्रत गाथा श्रद्धा से जो सुनता सुनता हो कल्याण जी संतोषी मैया को प्रणाम जी [संगीत] को गलो देवरदान जी संतोषी मैया को प्रणाम जी किसी गांव में एक बुढ़िया रहा करती थी

भक्तों को उसके साथ पुत्र थे चाहे बड़े पुत्र तो कमाते धमाते थे परंतु सातवां सबसे छोटा कुछ भी नहीं करता था बुढ़िया को अपने 6 बड़े बेटों से बहुत प्यार था उन्हें बड़े प्रेम से भजन करती और उनकी बच्ची खुशी जूठन से साथ में को भजन कराया

करती थी सातवें पुत्र की पत्नी यह सब देखकर मां ही मां बहुत दुखी रहती थी परंतु सातवां पुत्र था की उसकी बटन पर विश्वास ही नहीं करता था परंतु पत्नी के बहुत खाने पर एक दिन खाने के समय आंगन में चारपाई पर जाकर चादर ओड कर लेट गया और स्वास्थ्य

खराब होने का बहन करने लगा घुसने देखा की मां ने चाहे भाइयों को प्रेम से भजन करवाया और उन सब का बच्चा कुछ भजन इस को परोस दिया यह देखकर उसका मां शुद्ध हो गया भक्तों मां से बोला मैं प्रदेश जाता हूं मां बुढ़िया ने भी का दिया कल का जाता है

तो बेटे आज ही चला जा जाते समय पत्नी से कुछ निशानी मांगता है [संगीत] पत्नी को बार पाक रही थी पीठ पे दोनों हाथ धरे थे पति भी अंगूठी देखकर निशाने भक्तों पर देश चले थे पत्नी बोली जो स्वामी हम काटेंगे जिंदगानी बिना आप जी ईश्वर करेंगे कल्याण जी

संतोषी व्रत कथा श्रद्धा से जो सुनता सुनता हो कल्याण जी संतोषी मैया को प्रणाम जी [संगीत] उधर पति प्रदेश पहुंच और एक साहूकार के यहां नौकरी करने लगा धीरे-धीरे अपनी मेहनत से उसने कम धंधे को दोगुना चोगन बड़ा दिया और फिर पुरी चीज जान से मेहनत कारी जिससे

सेठ का विश्वास भी जीत लिया कम धंधे में इतना को गया की अपने परिवार के विषय में सब कुछ भूल गया उधर उसकी मां और भाभियों उसकी पत्नी पर भारी अत्याचार करते थे उसे भूस की रोटी देते नारियल के खोपरे में पानी देते ऐसे ही दुखी मां से एक दिन जंगल

से लकड़ी लेने जाति है तो क्या देखते है की कुछ स्त्रियां वहां पूजन आरती कर रही है पूजन के पाक जिज्ञासा वाश वो उनसे पूछने लगती है की यह कौन से देवी-देवता का पूजन है तब वो स्त्रियां उसे बताती हैं की ये पवन संतोषी माता के व्रत का पूजन है इस

व्रत का पालनपुर 16 शुक्रवार तक करना चाहिए शुक्रवार को स्नान ध्यान के पश्चात मां संतोषी का पूजन कर उपवास रखना चाहिए साइन कल कथा के पश्चात गुड चैन का भोग अर्पित करना चाहिए मां अवश्य मुरादे पूर्ण करती है यह सोच उसने अपने मां में भी अगले

शुक्रवार को मां का उपवास रखना और मां की मुराद मांगने की सोची मां के नाम की मन्नत मनी मां संतोषी तुम दया की दानी मेरे पति से मुझको मिला तो अपनी कृपा मां बर्स दो मैन चमत्कार दिखलाया पति को परिवार याद आया लता नाम रे वापस में जाऊं उनके पास रे

पवन संतोषी व्रत कथा [संगीत] पति सोने लगा वापस जाऊं तो जाऊं कैसे सर हिसाब किताब तो अभी बाकी पड़ा है परंतु मां संतोषी की कृपा से उसका सर हिसाब किताब एक ही दिवस में पूर्ण हो गया उसके पास बहुत साधन भी ए गया जी धन को उसने

स्वर्ण मुद्राओं में बादल लिया और थैली बनाकर अपने घर की और लोट चला उधर उसकी पत्नी ने जब मार्ग में धूल उड़ती अच्छी तो मां संतोषी से पूछने लगी मां ने कहा बेटी तेरा पति वापस ए रहा है जा सुखी लड़कियों के तीन गदर बना एक नदी किनारे एक मेरे

मंदिर में और तीजा अपने सर पर रख अपने घर पर जाना जोर से भूमि पर पटकन और तेज आवाज में कहना तो लकड़ी ले आई मुझे भूस की रोटी दो नारियल के खोपरे में पानी दो घर में कौन मेहमान आया है और उधर उसका पति मार्ग में

लड़कियां देखकर रुक जाता है वहां भजन इत्यादि कर अपने घर लौटता है अपनी मां भाइयों एवं भतीजे भतीजियों से मिलता है परंतु अपनी पत्नी के विषय में उसे कुछ याद नहीं राहत तभी उसकी पत्नी घर के अंदर आई है तेज आवाज में चिल्लाती है भूस की रोटी

दो नारियल के खोपरा में पानी दो घर में कौन मेहमान आया है उसकी आवाज सुनकर उसका पति बाहर आता है तो उसके हाथ में अंगूठी देख कर उसे पहचान जाता है अपनी पत्नी की यह हालात देख वो दुखी होता है और मां से अलग घर में रहने के लिए चाबी सकता है अलग

घर में जा उसकी पत्नी मां संतोषी का उद्यापन करवाती है परंतु उसकी जेठाणिया चल से बालको को खट्टा खिलाकर उद्यापन भांग करवा देते हैं खट्टा था व्रत भांग कर डाला क्रोध दिखाए मैया से फिर माफी मांगी है संतोषी मैं अज्ञानी दुश्मन करो तुम अपराध जी व्रत गाथा श्रद्धा से जो सुनता सुनता हो

कल्याण जी संतोषी मैया को प्रणाम जी [संगीत] जय संतोषी मां संतोषी माता से क्षमा मांगने के पश्चात मां से प्रार्थना करती है की हेमा मैं आपका उद्यापन फिर से करवाऊंगी मां संतोषी ने दर्शन दिए और कहा है पुत्री अब कोई भूल एन करना ध्यान रहे मेरे उद्यापन के दिन

कोई भी खट्टा पदार्थ ना खाने पे मां की कृपा से पति भी जय से वापस ए गया अगले शुक्रवार को उसने फिर से मां का उद्यापन किया इस बार भी जेठानी के लड़कों ने खट्टा मांगा तो उसने उन्हें घर से बाहर भाग दिया और ब्राह्मण कुमारन को भोज करवा कर दान

दक्षिण दी मां संतोषी अत्यंत प्रश्न हुई और ठीक नो मा पश्चात उसे एक चंद समाज सुंदर पुत्र की प्रताप हुई तो देखा आपने भक्तों जी तरह उसे स्त्री ने पूरे विधि विधान से मां संतोषी के 16 शुक्रवार के व्रत किया और इच्छा पूर्ण होने पर उद्यापन

करवाया और जीवन में मां संतोषी की कृपा पी ठीक इस तरह यदि आप भी मां संतोषी के व्रत पूरे विधि विधान से करेंगे तो आप और आपके परिवार पर मान की विशेष कृपा सदा बनी रहेगी बोलिए संतोषी मैया की मां संतोषी नाम है सच्चा भक्तों मां से जपते जाना पूजन और चैन

मां का करना चंदन का इन्हें तिलक लगाना हम सागर से तार जाओगे संतोषी कृपा पाओगे मैया करेगी कल्याण जी संतोषी व्रत कथा श्रद्धा से जो सुनता सुनता हो कल्याण जी संतोषी मैया को प्रणाम जी [संगीत] मैया को प्रणाम जी संतोषी मैया संतोषी [प्रशंसा] [संगीत] जैसा तुलसी माता अपनी सेवक जल की अपनी

सखी सुख संपतिदाता जय जय संतोषी माता [संगीत] मैया जय श्री माता की अपने से मत जाना की सुख संपत्ति डाटा जय जय संतोषी माता सुंदर की रस सुनहरी मैया आधा रंग किरा मां के हीरा पन्ना नमके तन सिंह जय-जय संतोषी माता ग इरु छाता छवि रे कमल सुह मैया बदन कमल सोनी

का मे मांधाता करूं राम मोहन [संगीत] धोरे प्यार मैया जय भोले प्यार धूप दीपक मधुमेह रूप दीपा भोग धारी [संगीत] जय संतोषी माता परम फिर दोस्ती और संतो से कहना आई संतो की गहराई भक्तन पे भाबयो जय जय संतोषी माता सुप्रभात [संगीत] ओ जान वारसेशो ही मैया झुका के भक्ति मंडली आई

भस्त मंडल आई कथा सुनते मही [प्रशंसा] जय जय संतोषी माता मंदिर जगमग ज्योति मंगल को की छी मैया मंगलमय [संगीत] इलैट हम मानत चरनन सर दी जय जय सतगुरु श्री माटी भाव मा पूजा अंबे कृतज्ञ मैया की जय हमारे इच्छा फल दीजिए जय-जय [संगीत] संत दुखी दरी रोगी [संगीत] शब्द की

मैया शंकर तेनु के [संगीत] बहुत डर एन भारी घर सुख सोहागिया [संगीत] मां बल पूजा [संगीत] खतरा बनकर पूजा का सफर कर घर आनंद आओ जय जय संतोषी [संगीत] [संगीत] मां संकट तू ही निवार संकट तू ही मां अंबे जय जय संतोषी माता परसो सीमा की आरती जो ग वे जो कोई चले

प्रीत सिख सुख संपत्ति प्रीत से थे सुख संपत्ति जी भर के भावे जय जय संतोषी माता संतोषी माता मैया जय संतोषी माता मंदिर शिवा भक्ति जानकी अपने से मत जानकी सुख संपत्ति डाटा जय जय संतोषी माता जय संतोषी माता [संगीत] जानकी सुख संपत डाटा दर्शन तोशिमा तो [संगीत] [प्रशंसा]

अंबे तू है जगदंबे काली जय दुर्गे खप्पर वाली तेरे भारती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती है जगदंबे काली जय दुर्गे खप्पर वाली तेरे ही गुंडे बैग चीन ओ मैया तेरी आरती दानव दाल पर टूट पड़ो मकर के सिंह सवारी करके सिंह सवारी तेरे भक्तजनों पे माता भीर पड़ी है भारी

है भारी दावत दाल पर टूट पड़ो मां करके सिंह सवारी है 10 भुज वाली दुखियों के टुकड़े की वर्ती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती तू है जगदंबे काली जय दुर्गे का पर हो मैया हम सबको देंगे आरती मां बेटे का है ना ही मेरे मां का भूत का भूत सुन है

प्रणाम माता सनी गट मी को मां का मां बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नता बड़ा ही निर्मल बाबा भूत का भूत सुन है प्रणाम माता सनी को माता सुनीत सब पे करुणा बरसाने वाली अमृत बरसाने वाली दुखियों के दुख देने वाली ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती [संगीत]

काली जय दुर्गे खप्पर वाली तेरे ही गन गाड़ी जी ओ मैया रे तेरी आरती नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना ना चांदी ना सोना हम तो मांगे मां तेरे मां में एक छोटा सा कुन [संगीत] नहीं मांगते धन और दौलत ना चांदी ना सोना चांदी ना

हम तो मांगे मां तेरे मां में एक छोटा सा को ना एक छोटा सा सबकी बिगड़ी बनाने वाली लॉज बचाने वाली सतियों के सत्य को सावर्ती ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती [संगीत] हम सब को जान तेरी आरती चरण शरण में खड़े तुम्हारी ले पूजा की थाली

पूजा की थाई वध हस्त सर पर रख दो मां संकट हारने वाली संकट हारने वाली चरण शरण में खड़े तुम्हारी ने पूजा की थाली [संगीत] वध हस्त सर पर रख दो मां संकट हारने वाली मां भर दो भक्ति रस प्याली अष्ट भुज वाली भक्तों के कार्य हम सब उतारे तेरी आरती

तू है जगदंबे काली जय दुर्गे खप्पर वाली तेरे ही उड़ जाए ओ मैया हम सब को फाड़ के मैया हम सब उतारे तेरी आरती ओ मैया हम सब उखाणे तेरी आरती [संगीत] [संगीत] ओम जय अंबे गौरी मैया जय श्याम बोल तुमको [संगीत] मैड को पूजन से दोनों चंद्र बदलना को [संगीत] ओ गोरी

[संगीत] बर्स जी [संगीत] [संगीत] सूर्य न मनी जनसेवक इनके दुख हरि [संगीत] [संगीत] रजत समझ ज्योति ओम जय अंबे गौरी [संगीत] निभाती हम की दिन मधुमति ओम जय गौरी चंदा मुंडे संघरे शोध कबीर मधु के [संगीत] ब्रह्मदौड़ी रुद्रा [संगीत] की [संगीत] आंख खान [संगीत] मंगल गावत डमरु [संगीत] जगत की माता [संगीत]

सुख संपत्ति करता ओम ओ गोरी भुज कर रति शोहित वर्मा री मां वंचित भला पावत सेवक न नई ओम [संगीत] जोड़ी कंचन था नबिराजत अगर [संगीत] तुम्हें रजत होती रतन ज्योति ओम [संगीत] जय गौरी श्री अंबे जी की आरती [संगीत] जाओगे शिवानंद स्वामी सुख संपत्ति पाव ओम जय अंबे गौरी [संगीत] #शकरवर #भकत #भजन #सरव #मगल #मगलय #ॐ #भरभव #सव #य #दव #सरव #भतष #दरग #चलस #आरत
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