सम्पूर्ण चालीसा संग्रह || Chalisa Collection || Sampurna Chalisa Sangrah || Audio Jukebox #lyrics

सम्पूर्ण चालीसा संग्रह || Chalisa Collection || Sampurna Chalisa Sangrah || Audio Jukebox #lyrics Chalisa Sangrah


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bhajan lyrics जय गणपति सदगुण सदन कविवर बदन कृपाल विघे जय जय गिरिजा [संगीत] लाल [संगीत] जय जय जय गणपति गण राजू मंगल भरण करण शुभ काजू जय गज बदन सदन सुख दाता विश्व विनायक बुद्धि विधाता [संगीत] वक्रतुंड शुचि शंड सुहावना तिलक त्रिपुंड भाल मन बावन राजत मणि मुक्त उर माला स्वरण मुकुट श्री नयन

विशाला पुस्तक पाण कुठार त्रिशूर मोदक भोग सुगंधित फलम सुंदर पीतांबर तन साधित चरण पादुका मुनि मन [संगीत] राजित धन शिव सुवन षडानन भ्राता गौरी लालन विश्व विख्यात रिद्धि सिद्धि तब चम सुधारे मूषक वाहन सोहत द्वारे कहो जन्म शुभ कथा तुम्हारी अति सुचि पावन मंगलकारी एक समय गिरिराज

कुमारी पुत्र हे त तब कीना बा [संगीत] भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा तब पहुंचो तुम धरी द्विज रूपा अतिथि जान के गौरी सुखरी बहु विधि सेवा करी तुम्हारी अति प्रसन्न हवे तुम वरदी मात पुत्र हित जो तप कीना मिल पुत्र तही बुद्धि विशाला बिना गरभ धारण यही [संगीत] काला गणनायक गुण ज्ञान

निधा पूजित प्रथम रूप भगवान अस कही अंतर धान रूप होवे पालन पर बालक स्वरूप हवे बने शिशु रुधन जब ही तुम ठाना लखी मुख सुख नहीं गौरी समाना सकल मगन सुख मंगल गाव ना भते सुरन सुमन वर्ष [संगीत] शंभु उमा बहु दान लुटा वही सुर मुनि जन सुत देखन

आव लखी अति आनंद मंगल साजा देखन भी आए शनि राजा निज अवगुण गुण शनि मन मा बालक देखन चाहत नाही गिरिजा कछु मन भेद बढ़यो उत्सव मोरन शनि तू ही [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] भायो कहत लगे शनि मन सक उचाई का कर हो शिशु मोहि दिखा

नहीं विश्वास उमा उर भय शनि सो बालक देखन कहि पद तही शनि दृग कोण प्रकाशा बालक सिर उड़ी गयो आकाशा गिरिज गिरी विकल हव धरनी सो दुख दशा गयो नहीं [संगीत] हाहाकार मजो कैलाशा शन कीनो लक सुत को नाशा तुरत गरुड़ चढ़ी विष्णु सिधायो काटी चक्र सो गज सिर

लाए बालक के धड़ ऊपर प्राण मंत्र पढ़ी शंकर डारो नाम गणेश शंभु तब कीने प्रथम पूज्य बुद्ध निधि वर [संगीत] दीने बुद्धि परीक्षा जब शिव कीना पृथ्वी कर प्रदक्षिणा [संगीत] चले षडानन भरम बुलाई रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई चरण मातु पितु के धर लीने तिनके साथ प्रदक्षिणा कीने न गणेश कही शिव हीय

हरष नते सुरन सुमन बहु [संगीत] से तुमहरी महिमा बुद्धि बढ़ाई शेष सहस मुख सके न गाई मैं मत हीन मलीन दुखारी करह कौन विधि विनय तुम्हारी बजत राम सुंदर प्रभु सा जग प्रयाग ककरा दुर्वासा अब प्रभु दया दीन पर कीज अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजे श्री गणेश यह चालसा पाठ करे कर

ध्यान नित नव मंगल ग्रह बसे लह जगत समान संबंध अपने सहस्त्र दश ऋषि पंचमी दिनेश पूर्ण चालसा भयो मंगल मूट गणेश मंगल मूर्ति गणेश मंगल मूर्ति [संगीत] गणेश जय गणेश गिरिजा सुवन मंगल मूल सुजान कहत अयोध्या दास तुम देहु अभ [संगीत] [प्रशंसा] वरदान जय गिरिजापति दीन दयाला सदा करत संतन

प्रतिपाला भाल चंद्रमा सोहत नी के कानन कुंडल नाग फनी [संगीत] के अंग गौर शिर गंग बहाए मुंड माल तन क्षार लगाए वस्त्र खाल बागमबर सोहे छवि को देखना मन मोहे मैं ना मात की हवे दुलारी वाम अंग सोहत छवि न्यारी कर त्रिशूल सोहत छवि भारी करत सदा शत्रु न क्षय [संगीत]

कारी नंद गणेश है त कैसे सागर मध्य कमल है जैसे कार्तिक श्याम और गणरा या छवि को कही जात न काऊ देवन जब ही जाए पुकारा तब ही दुख प्रभु आप निवारा किया उपद्रव तारक भारी देवन सब मिली तुम ही [संगीत] जुहारी तुरत शानन आप पठायो लव नि मेश महामारी

गिराया आप जलंधर असुर संघरा सुयश तुम्हार विदित संसारा त्रिपुरा सुर सन युध मचाई सब ही कृपा कर लीन बचाई किया तप ही भागी रत भारी पूरब प्रति ज्ञाता सु [संगीत] पुरारी दान नमह तुम सम को नाही सेवक स्तुति करत सदा ही वेद माही महिमा तुम गाई अकथ अनादि भेद नहीं पाई प्रकट उदधि

मंथन में ज्वाला जरत सरासर भए बिहाला किनी दयात करी सहाई नीलकंठ तब नाम [संगीत] कहाई पूजन रामचंद्र जब कीन्हा जीत के लंक विभीषण दीना सहस कमल में हो रहे धारी कीन परीक्षा त बही पुरारी एक कमल प्रभु राखे उ जोई कमल नयन पूजन चह सोई कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर भय

प्रसन्न दिए की चित [संगीत] ब जय जय जय अनंत अविनाशी करत कृपा सबके घट वासी दुष्ट सकल नित मोही सतावे भ्रमित रहो मोही चैन ना आवे त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकार यही अवसर मोही आन उबार ले त्रिशूल शुन को मारो संकट ते मोही आन [संगीत] उबार मात पिता भ्राता सब

होई संकट में पूछित नहीं कोई स्वामी एक है आस तुम्हारी पाया रह संकट भारी धन निर्धन को देत सदा ही जो कोई जांचे सो फल पाई अस्तुति केही विधि करे तुम्हारी क्म हो नाथ अब चूक [संगीत] हमारी शंकर हो संकट के नाश मंगल कारण विघ्न विनाश योग यति मुनि ध्यान

लगावे नारद शारद शीष न वावे नमो नमो जय नमः शिवाय सुर ब्रह्मा दिक पार ना पाए जो यह पाठ करे मन लाई ता पर होत है शंभु [संगीत] सहाई ऋण या जो कोई हो अधिकारी पाठ करे सो पावन हारी पुत्र हीन कर इच्छा जोई निश्चय शिव प्रसाद तेही होई पंडित त्रयोदशी को

लावे ध्यान पूर्वक होम करावे त्रयोदशी व्रत करे हमेशा ताके तन नहीं रहे [संगीत] कलेशा धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे शंकर सन्मुख पाठ सुनावे जन्म जन्म के पाप नसावे अंत धाम शिव पुर में पावे कहे अयोध्या दास तुम्हारी जानी सकल दुख हरहु हमारी कहे अयो ध्या दास तुम्हारी जानी सकल दुख हर

हमारी नित नेम उठी प्रात ही पाठ करो 4 तुम मेरी मनोकामना पूर्ण करो जगदीश मग सिर छठी है मंत ऋतु संवत च जान अस्तुति चालीसा शिव ही पूर्ण कीन [संगीत] कल्याण नमो नमो दुर्गे सुख करनी नमो नमो अंबे दुख हरनी निरंकार है ज्योति तुम्हारी हु लोक फैली [संगीत] उजियारी शशि ललाट मुख महा

विशाला नेत्र लाल भृकुटी वि कराला रूप मात को अधिक सुहावे दरस करत जन अति सुख पावे तुम संसार शक्ति य कीन्हा पालन हेतु अनधन दीन्हा अनन पूना हुई जग पाला तुम ही आदि सुंदरी [संगीत] बाला प्रलय काल सब नाश हारी तुम गौरी शिव शंकर प्यारी शिव जोगी तुम्हरे गुण

गावे ब्रह्मा विष्णु तुम्हे नित ध्यावे रूप सरस्वती को तुम धरारा दे सु बुद्धि ऋषि मुनि न उबरा धरा रूप नर सिंह को अंबा परगट भई फाड़ हर [संगीत] खंबा रछा कररी प्रधान बचाओ रणा कुश को स्वर्ग पठायो लक्ष्मी रूप धरो जग माही श्री नारायण अंग समाही शीर सिंधु में कर

बिलासा दया सिंधु दीजे मन आसा हिंगलाज में तुम ही भवानी महिमा अमित ना जाए [संगीत] बखानी मातंगी धो मावती माता भुवनेश्वरी बगला सुखदाता श्री भैरव तारा जगतारिणी छिन भाल भव दुख निवारनी केहरी वाहन सोह भवानी लांगुर बीर चलत अगवानी कर मेंे खा पर खड़ग विराजे जा को देख काल [संगीत]

दरवाजे सोहे अस्त्र और त्रिशला जाते उठत शत्रु ही सोला नगर कोट में तुम ही विराजत ती हो लोक में डंका बाजत शुंभ निशुंभ दानव तुम मार रक्त बीज शंख संघार महिषा सुर निप अति अभिमानी जहि अभार महि [संगीत] अकुला रूप कराल काली को धारा सेन सहित तुम ती

संघरा पर गाढ़ संतन पर जब जब भय सहाय मत तुम तब तब अमरपुरी और सब लोका तब महिमा सब रहे अशोका ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी तुम्हें सदा पूजे नर [संगीत] नारी प्रेम भक्ति से जो जस गावे दुख दरिद्र निकट नहीं आवे ध्यावे तुम्हे जो नर मन लाई जन्म मरण ता को छूटी

जाई जोगी सुर मुनि का पुकारी जोग ना हो बिन शक्ति तुम्हारी शंकर आचार ज तप कीनो काम क्रोध जीती सब [संगीत] लीन निश दिन ध्यान धरो शंकर को काह काल नहीं सु मिरो तुमको शक्ति रूप को मरम ना पायो शक्ति गई तब मन पछताओ शरणागत है कीर्ति बखानी जय जय जय जगदंब

भवानी भई प्रसन्न आदि जगदंबा दई शक्ति नहीं की [संगीत] विलंबा मोख मा तो कष्ट अति घेरो तुम बिन कौन हरे दुख मेरो आशा तृष्णा निपट सतावे रिप मूरख मुही अति डर पावे शत्रु नाश की जय महारानी सुमिरो एक चित तुम ही भवानी करो कृपा है बातू दयाला रिद्धि सिद्धि देक रह [संगीत]

निहाला जब लग जियो दया फल पाऊ तुमरो जस में सदा सुनाऊ दुर्गा चालसा जो कोई गावे सब सुख भोग परम पद पावे देवीदास शरण निज जानी करहु कृपा जगदंब भवानी देवीदास शरण निज जानी करहु कृपा जगद ंग [संगीत] [संगीत] भवानी श्री गुरु चरण ध्यान धर [संगीत] सुमिरा सच्चिदानंद श्याम चालीसा बनत हूं रज

चौपाई छंद [संगीत] श्याम श्याम बज बारम बारा सहज ही हो भव सागर पारा इन सम देव ना दूजा कोई दीन दयालु ना दाता होई [संगीत] भीम सत्र अहल वति जाया कहीं भीम का पौत्र कहाया यह सब कथा सही कल्पा तनक ना मानो इसमें अंतर पर बरीक विष्णु

अवतारा भक्तन हेतु मनुज तनु धारा वसुदेव देव की प्यारे यशु मति मैया नंद [संगीत] दुलारे मधुसूदन गोपाल मुरारी ब्रज किशोर गोवर्धन दारी सियाराम श्री हरि गोविंदा दीन पाल श्री बाल मुकदा दामोदर रण छोड़ बिहारी नाथ द्वारिकाधीश खरारी नर हरि रूप प्रहलाद पयारा खंभ पारी हिरना कुश मारा [संगीत] राधा वल्लभ रुक्मण

कंता गोपी वल्लभ कंस अनंता मन मोहन चित चोर कहाय माखन चोर चोर कर खाए मुरली धर यदुपति घनश्यामा कृष्ण पतित पावन अभिराम माया पति लक्ष्मी पतिसा पुरुषोत्तम केशव [संगीत] जगदीशा विश्व पति त्रिभुवन उजियारा दीन बंधु भक्तन रखवा प्रभु का भेद कोई ना पाया शेष महेश थके मु निराया नारद शारद ऋषि

योगिंदर श्याम श्याम सब रटते निरंतर कवि को विध कर सके ना गिनता नाम अपार अथाह अनंता [संगीत] हर सृष्टि हर युग में भाई ले अवतार भक्त सुखदाई हृदय माही करी देखु विचारा शाम बजे तो हो निस्तारा कीर पड़ाव गण का तारी भीलन की भक्ति बलिहारी सती अहिल्या गौतम नारी भई श्राप वश शीला

[संगीत] दुखारी श्याम चरण रज नित ला पहुंची पति लोक में जाई अजामिल अरु सदन कसाई नाम प्रताप परम गति पाई जाके श्याम नाम अधारा सुख लह ही दुख दूर हो सारा श्याम सुलोचन है अति सुंदर मोर मुकुट सिर तन पीतांबर [संगीत] गलवे जंती माल सुहाई छवि अनूप भक्तन

मनवाई श्याम श्याम सुम रहु दिन राती श्याम दुपहरी अरु पर भाती श्याम सरती जिसके रथ के रोड़े दूर होए उस पथ के श्याम भक्त ना कहीं पर हारा भीर परी तब श्याम [संगीत] पुकारा रसना श्याम नाम रस पीले जीले श्याम नाम के हाले संसारी सुख भोग मिलेगा अंत श्याम सुख योग

मिलेगा श्याम प्रभु है तन के काले मन के गोरे भले वाले श्याम संत भक्तन हितकारी रोग दोष अगना शय भारी [संगीत] प्रेम सहित जय नाम पुकारा भक्त लगत श्याम को प्यारा खाटू में है मथुरा वासी पारब्रह्म पूरण अविनासी सुधा तान भरी मुरली बजाई चद छिना ना जहां सुनी पाई वृद्ध बाल जैते

नारी नर मुग्ध बए सुनि बंची के [संगीत] स्वर दौड़ दौड़ पहुंचे सब जाई टू में जहां श्याम कनाई जिसने श्याम स्वरूप निहारा भव बै से पाया छुटकारा दौड़ दौड़ पहुंचे सब जाई हाटू में जहां श्याम कनाई जिसने श्याम स्वरूप निहारा भव भ से पाया छुटकारा श्याम सलोने सावज बर बरीक तनु

उधार इच्छा पूरण भक्त की करो ना ला भा करो ना ला भा करो ना लाहु [संगीत] बा बंशी शोभित कर मधुर नील जलद तन श्याम अधर जनु बिंब फल नयन कमल अभिराम पूरण इंद्र अरविंद मुख पीतांबर शुभ सा जय मन मोहन मदन छवि कृष्ण चंद्र [संगीत]

महाराज जय य दुन न जय जगवंदन जय वसुदेव देव की नंदन जय यशोदा सुत नंद दुलारे जय प्रभु भक्तन के प्रग [संगीत] तारे जय नट नागर नाग नथैया कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया पुनि नख पर प्रभु गिरिवर दारो आनन कष्ट निवारो बंसी मधुर अधर धरी तेरी होवे पूरण विनय मेरी आओ हरि पुनि माखन

जाखो आज लाज भारत की [संगीत] राखो गोल कपोल चिबुक अरुणा रे मृद मुस्कान मोहिनी दार रंजित राजीव नयन विशाला मोर मुकुट व जंती माला कुंडल पीत पट आछ कट किंक का चन काछ नील जलज सुंदर तनु सो है छवि लक सुर नर मुन मनमो [संगीत] है मस्तक तिलक अलक घुंघराले

आओ कृष्ण बांसुरी वाले कररी प पान पूत नहीं तार पका पका कागा सुर मारयो दु बन जलित अगिन जब ज्वाला भ शीतल लखि तही नंदलाला सुरपति जब बृज चढ़े और साई मु सरधा बार बार [संगीत] बरसाई लगत लगत ब्रज चह बहा गोवर्धन नख धारी बचाओ लखि अ सुदा मन भ्रम

अधिका मुख मह च भुवन दिखाई दुष्ट कं अति उधम मचा कोट कमल जब फूल मंगायो नाथ काली यही तब तुम लीने है चरण चिन्ह दे निर्व [संगीत] कीने करी गोपन संग रास बिलासा सबकी पूरण करी अभिलाषा केतिक महा असुर संघार कंस ही केस पकड़ी दे मारयो मात पिता की बंद

छुड़ाई उग्र सैन कह राज दिलाई महि से मृतक छ हो सुत लायो मात दे की चोक [संगीत] मिटायो भोमा सुर मुर दैत सहारी लाए ट दस सहज कुमारी देवी महि त्रण शीर सहारा करा सिंधु राक्षस कह मारा असुर सुर आदिक कुमार भक्तन के तब कष्ट निवार दन

सुदामा के दुख टार तंदुल तीन मुठी मुख [संगीत] डारो प्रेम के साग विदुर घर मांगे दुर्योधन न के मेवा त्यागे लखी प्रेम की महिमा बार ऐसे श्याम दीन हितकारी मारत के पत रथ हाके लिए चक्र कर नहीं बल थाके निज गीता के ज्ञान सुनाए भक्तन हृदय सुदा [संगीत]

बरसाए मीरा ती ऐसी मत वाली विष पी गई बजा कर ताली राणा भेजा सांप पिटारी शालिग्राम बने बनवारी निज माया तुम विद ही दिखाय उरत संशय सकल मिटायो त सत निंदा कर तत काला जीवन मुक्त भयो [संगीत] शिशुपाला जब ही द्रौपदी तेर लगाई दीना नाथ लाज अब जाई रत ही बसन बने

नंदलाला बढ़े चीर भय अरि मुख काला अस अनाथ के नाथ कन्हैया डूबत भवर बचावत नैया सुंदर दास आसर धारी दया की ज [संगीत] बनवारी नाथ सकल मम कुमति निवारो शम हु बेगी अपराध हमारो खोलो पट अब दर्शन दीजे बोलो कृष्ण कन्हैया की जय सकल मम कुमति निवारो क्म हु बगी अपराध

हमारो खलो पट अब दर्शन दीजे बोलो कृष्ण कन्हैया की जय यह चालीसा कृष्ण का पाठ करे उधा अष्ट सिद्धि नवनिधि फल लहे पदारथ [संगीत] चारी जय गणेश गिरजा सुवन मंगल करण कृपाल दनन के दुख दूर करी कीज नाथ निहाल जय जय श्री शनि देव प्रभु सुन विनय महाराज करह कृपा हे रवि तन

राख जन की [संगीत] [संगीत] लाज [संगीत] जयति जयति शनि देव दयाला करत सदा भक्तन प्रतिपाला चार भुजा तनु श्याम विराजे माथे रतन मुकुट छवि छाज परम विशाल मनोहर वाला तेरी दृष्टि बिकट विकराल कुंडल श्रवण चमा चम चम के ये माल मु तन मणि दम के करम गदा त्रिशूल कुठारा पल विच करे अरही

हारा पिंगल कृष्णा छाया नंदन यम कोणस्थ रद्र दुख [संगीत] भंजन सौरी मंद शनि दश नामा भानु पुत्र पुज ही सब कामा जा पर प्रभु प्रसन्न जाही रंक भराव करे चण माही पर्वत ह त्रण होई निहारत ण को पर्वत कर डत राज मिलत बन राम ही दन के कहु की मत हरलीन

बन में मृग कपट दिखाई मात जान की गई चुराई लक्षण ही शक्ति विकल करी डारा मच गई दल में हाहा कारा रावण की गति मति बौराई रामचंद्र सो बैर बढ़ाई दियो कीत करी कंचन लंका बजी बज रंग बीर की [संगीत] डंका रिप विक्रम पर तू ही पग

उधारा चित्र मयूर नि गली ग हारा हारन लखा लाख चोरी हाथ पैर डरवा तोरी भारी दशा नि कस्त दिखा तेल ही घर कोलू चलवा बिने राग दीपक मह कीनो तब प्रसन्न प्रभु है सुख दिन हरिश चंद्र निप नारी बकानी आप भरे दोम घर पानी तैसे नल पर दशा सिरानी बूजी मीन कूद गई

पानी श्री शंकर ही ग हो जब जाई पार्वती को सती कराई तनिक लोकतक री सा नव उड़ गयो गोरी सुत [संगीत] ससा पांडव पर भई दशा तुम्हारी बची द्रौपदी होती उगाई कौरव के भी गति मति मारयो युद्ध महाभारत कर डार रवि कह मुख महाघर तत् काला लेकर कूद परो

पाता शेष देव लखी विनती लाई रवि को मुख ते दियो छुड़ाई वाहन प्रभु के साथ सुजाना जगद कज गर धप मृग स्वाना जमुक सिंघा दी नख दरी सोपल ज्योतिष कहत पुकारी गज वाहन लक्ष्मी ग्रह आवे ते सुख संपति उपजा कर दब हान करे बहु काजा सिं सिद्ध कर राज [संगीत]

समाजा जमुक बुद्धि नष्ट कर डार मृग दे कष्ट प्राण संहार जब आव प्रभु स्वा सवारी चोरी आदि होए डर भारी सही चार चरण यह नामा स्वरण लोह चांदी अरु तामा लोह चरण पर जब प्रभु आवे धन जन संपति नष्ट करावे [संगीत] समता ताम्र रजत शुभकारी स्वर्ण सर्व सर्व सुख मंगल

भारी जो यह शनि चरित्र नित गावे कबहु ना दशा निकृष्ट सतावे अद्भुत नाथ दिखावे लीला करे शत्रु के न श्री बलि ढीला जो पंडित सुयोग्य बुलवा विधिवत शनि ग्रह शांति [संगीत] कराई पीपल जल शनि दिवस चढ़ाव दीप दानद बहु सुख पावत कहत राम सुंदर प्रभु दाता शनि सुमिरत सुख होत

प्रकाशा पीपल जल शनि दिवस चढ़ाव दीप दान दे बहु सुख पावत कहत राम सुंदर प्रभु दाता शनि सुमिरत सुख होत प्रकाशा पाट शनिचर देव को तीनों भक्त [प्रशंसा] तैयार करत पाठ 4 दिन हो भव सागर पार हो भव सागर पार ओ भव सागर पार [संगीत] विष्णु सुनिए विनय सेवक की चित

लाए कीरत कुछ वर्णन करू दीज ज्ञान बताए [संगीत] नमो विष्णु भगवान खरारी कष्ट नशा वन अखिल बिहारी प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी त्रिभुवन फैल रही [संगीत] उजियारी सुंदर रूप मनोहर सूरत सरल स्वभाव मोहनी मूरत तन पर पीतांबर अति सोहत वजन की मा ला मन मोहत शंख चक्र कर गदा

विराज देखत दैत्य असुर धल भाजे सत्य धर्म मद लोभ ना गाजे काम क्रोध मध लोभ ना [संगीत] छाजे संत भक्त सजन मन रंजन नुज असुर दुष्ट दल गंजन सुख उपजा कष्ट सब भंजन दोष मिटाए करत जन सज्जन पाप काट भव सिंधु उतार कष्ट नाश कर भक्त उबार करत अनेक रूप प्रभु

धारण केवल आप भक्ति के [संगीत] कारण धरण धेनु बन तुम ही पुकारा तब तुम रूप राम का धारा भार उतार असुर दल मारा रावण आदिक को सहारा आप वराह रूप बनाया हरना कश को मार गिराया धर्मत सेतन सिंधु बनाया 14 रत्नन को निकला [संगीत] या अमिल असुरन द्वंद मचाया रूप मोहनी आप

दिखाया देवन को अमृत पान कराया असुरन को छवि से बहलाया पूर्म रूप धर सिंधु मझा या मंद्र चल गिरी तुरत उठाया शंकर का तुम फंद छुड़ाया बसमा सुर को रूप [संगीत] दिखाया वेदन को जब असुर डुबाया कर पर बंध उन्हें ढूंढ वाया मोहित बनकर लही नचाया उस ही कर से भस्म

कराया असुर जलंधर अति बल दई शंकर से उन कीन लड़ाई हार पार शिव सकल बनाई कीन सती से छल खल [संगीत] जाई सुमिरन कीन तुम्हे शिव रानी बतलाई सब विपत कहानी तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी वृंदा की सब सुरत भुलानी देखत तीन दनुज शैतानी वृंदा आए तुम्हे लपटा नहीं हो

स्पर्श धर्म सति मानी हना असुर और शिव [संगीत] शैतानी तुमने ध्रुव प्रहलाद उभारे रणा कुश आदिक खल मरे गणिका और अजा मिलता रे बहुत भगत सिंधु उतारे हर हो सकल संताप हमारे कृपा करहो हरि सिर जन हारे देखा हूं मैं निज दर्स तुम्हारे दन बंधु भक्तन हितकारी [संगीत] चहत आप का सेवक

दर्शन करहु दया अपनी मधुसूदन जानु नहीं योग्य जप पूजन होए यज्ञ अस्तुति अनुमोदन शील दया संतोष सुलक्षणा विदित नहीं व्रत बोध विलक्षण करहु आप का किस विधि पूजन तुम त्र विलोक होते दुख [संगीत] भीषण करहु प्रणाम कौन विधि सुमिर कौन भाति मैं करह समर्पण सुर मुनि करत सदा शिव

गाई हर्षित रह परम गति पाई दन दुखन पर सदा सहाई निज जन जान लेव अपनाई पाप दोष संताप नचाओ भव बंधन से मुक्त [संगीत] कराओ सुख संपत्ति दे सुख उपजाऊ निज चरणन का दास बनाओ निगम सदाय विनय सुनावे पढ़े सुने सोजन सुख पावे सुख संपति दे सुख उपजाऊ निज चरणन का दास

बनाओ निगम सदा विन सुनावे पढ़े सुने सो जन सुख [संगीत] [संगीत] पावे श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधारी बरन रघुवर विमल जसु जो दायक फल चारी बुद्धिहीन तनु जान के सुमिरो पवन कुमार बल बुद्धि विद्या देहु मोही हरहु कलेश बकार [संगीत] [प्रशंसा] जय हनुमान ज्ञान गुण

सागर जय क पीसते ह लोक उजागर रामदूत अतुलित बल धामा अंजन पुत्र पवन सुत नामा [संगीत] महावीर विक्रम बजरंगी कुमत निवार सुमति के संगी कंचन वरण विराज सुवे सा कानन कुंडल कुंचित के सा हाथ वज्र अरु ध्वजा विराज कांधे मज जने उ साजे शंकर सुवन केसरी नंदन तेज प्रताप महा जग [संगीत] वंदन

विद्यावान गुण अति चतुर राम काज करि बै को तुर प्रभु चरित्र सुनी बैको रसिया राम लखन सीता मन बसिया सूक्ष्म रूप धर सेयही दिखावा विकट रूप धर लंक जरावा भीम रूप धरे असुर संघार रामचंद्र के काज सवा [संगीत] लाए सजीवन लखन जि आए श्री रघुवीर हरष उरला रघुपति कीनी बहुत

बढ़ाई तुम मम प्रिय भरत सम भाई सहस बदन तुमरो जस गा हस कही श्रीपति कंठ लगावे सनकादिक ब्रहम माद मुनीशा नारद शारद सहित [संगीत] अहिसा जम कुबेर दिगपाल जहां के कभी को विद कही सके कहां तुम उपकार सुग्रीव ही कीना राम मिलाए राज पद दीना तुमरो मंत्र विभीषण माना लंकेश्वर भए सब जग

जाना जुग सहस्त्र जो जन पर भानु लेलियो ताही मधुर फल जा [संगीत] प्रभु मुद्रिका मेली मुख माही जलद लांग गए अचरज नाही दुर्गम काज जगत के जेते सुगम अनुग्रह तुमरे ते थे राम द्वारे तुम रखवा होत ना आज्या बिन पैसा रे सब सुख ल तुम्हारी सरना तुम रक्षक काह को [संगीत]

डरना आपन तेज संभार आपे तीनों लोक हकते का पे भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे ना से रोग हरे सब पीरा जपत निरंतर हनुमत बीरा संकट ते हनुमान छुड़ा मन क्रम वचन ध्यान जोला [संगीत] सब पर राम तपस्वी राजा तिनके काज सकल तुम साजा और मनोरथ जो कोई

लावे सोई अमित जीवन फल पावे चारों जुग परताप तुम्हा है प्रसिद्ध जगत उजियारा साधु संत के तुम रखवारे असुर निकंदन राम [संगीत] दुलारे अष्ट सिधि नवनिधि के दाता असवर दनन जान की मा राम रसायन तुम्हरे पासा सदा रहो रघुपति के दासा तुम्हरे भजन राम को पावे जन्म जन्म के दुख विसरा वे अंतकाल

रघुवर पुर जाई जहां जन्म हरि भक्त कहा [संगीत] और देवता चत न धराई हनुमत से सर्व सुख करई संकट कटे मिटे सब पीरा जो सुमिरे हनुमत बलवीरा जय जय जय हनुमान को साई कृपा कर गुरुदेव की नाई जो सत बार पाठ कर कोई छूट ही बंदी महा सुख [संगीत]

होई जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होए सिद्धि साखी गौ सा तुलसीदास सदा हर चेरा कीज नाथ हृदय मह डेरा जो यह पड़े हनुमान चालीसा होए सिद्धि साखी गौरी सा तुलसीदास सदा हरि चेरा की ज नाथ हृदय मह रा पवन तनय संकट हरण मंगल मूर्ति रूप राम लखन सीता सहित हृदय बसह सुर भू

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