कविता क्या है ? (चिन्तामणि) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

कविता क्या है ? (चिन्तामणि) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Kavita Kya Hai (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla मनुष्य अपने भावों, विचारों और व्यापारों को लिये-दिये दूसरों के भावों, विचारों और व्यापारों के साथ कहीं मिलता और कहीं लड़ाता हुआ अन्त तक चला चलता है और इसी को जीना कहता है। जिस अनन्त-रूपात्मक क्षेत्र में यह …

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भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Bharatendu Harishchandra (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla हिंदी-गद्य-साहित्य का सूत्रपात करनेवाले चार महानुभाव कहे जाते हैं-मुंशी सदासुखलाल, इंशाअल्ला खाँ, लल्लू लाल और सदल मिश्र । ये चारों संवत्‌ १८६० के आस-पास वर्तमान थे । सच पूछिए तो ये गद्य के नमूने दिखानेवाले ही रहे; अपनी परंपरा प्रतिष्ठित करने …

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तुलसी का भक्ति-मार्ग (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

तुलसी का भक्ति-मार्ग (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Tulsi Ka Bhakti-Marg (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla भक्ति रस का पूर्ण परिपाक जैसा तुलसीदासजी में देखा जाता है वैसा अन्यत्र नहीं। भक्ति में प्रेम के अतिरिक्त आलंबन के महत्त्व और अपने दैन्य का अनुभव परम आवश्यक अंग हैं। तुलसी के हृदय से इन दोनों अनुभवों के …

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‘मानस’ की धर्म-भूमि (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

‘मानस’ की धर्म-भूमि (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Manas’ Ki Dharm-Bhumi (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla धर्म की रसात्मक अनुभूति का नाम भक्ति है, यह हम कहीं पर कह चुके हैं। धर्म है ब्रह्म के सत्स्वरूप की व्यक्त प्रवृत्ति, जिसकी असीमता का आभास अखिल विश्वस्थिति में मिलता है। इस प्रवृत्ति का साक्षात्कार परिवार और समाज …

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काव्य में लोक-मंगल की साधनावस्था (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

काव्य में लोक-मंगल की साधनावस्था (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Kavya Mein Lok-Mangal Ki Sadhanavastha (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla तदेजति तन्नैजति—ईशावास्योपनिषद् आत्मबोध और जगद्बोधा के बीच ज्ञानियों ने गहरी खाई खोदी पर हृदय ने कभी उसकी परवा न की; भावना दोनों को एक ही मनकर चलती रही। इस जगत् के बीच जिस आनंद मंगल …

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साधारणीकरण और व्यक्ति-वैचित्र्यवाद (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

साधारणीकरण और व्यक्ति-वैचित्र्यवाद (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Sadharanikaran Aur Vyakti-Vaichitryavad (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla किसी काव्य का श्रोता या पाठक जिन विषयों को मन में लाकर रति, करुणा, क्रोध, उत्साह इत्यादि भावों तथा सौंदर्य, रहस्य, गांभीर्य आदि भावनाओं का अनुभव करता है, वे अकेले उसी के हृदय से संबंध रखनेवाले नहीं होते; मनुष्य …

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रसात्मक बोध के विविध रूप (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

रसात्मक बोध के विविध रूप (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Rasatmak Bodh Ke Vividh Roop (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla संसार सागर की रूप तरंगों से ही मनुष्य की कल्पना का निर्माण और इसी रूप गति से उनके भीतर विविधा भावों या मनोविकारों का विधान हुआ है। सौंदर्य, माधुर्य, विचित्रता, भीषणता, क्रूरता इत्यादि की भावनाएँ …

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क्रोध (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

क्रोध (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Krodh (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla क्रोध दुःख के चेतन कारण के साक्षात्कार या अनुमान से उत्पन्न होता है। साक्षात्कार के समय दुःख और उसके कारण के सम्बन्ध का परिज्ञान आवश्यक है। तीन चार महीने के बच्चे को कोई हाथ उठा कर मार दे तो उसने हाथ उठाते तो …

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भय (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

भय (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Bhay (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla किसी आती हुई आपदा की भावना या दुख के कारण के साक्षात्‍कार से जो एक प्रकार का आवेगपूर्ण अथवा स्‍तंभ-कारक मनोविकार होता है उसी को भय कहते हैं। क्रोध दुख के कारण पर प्रभाव डालने के लिए आकुल करता है और भय उसकी …

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ईर्ष्या (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

ईर्ष्या (निबन्ध) : आचार्य रामचन्द्र शुक्ल Irshya (Nibandh) : Acharya Ramchandra Shukla जैसे दूसरे के दु:ख को देख दु:ख होता है वैसे ही दूसरे के सुख या भलाई को देखकर भी एक प्रकार का दु:ख होता है, जिसे ईर्ष्या कहते हैं। ईर्ष्या की उत्पत्ति कई भावों के संयोग से होती है, इससे इसका प्रादुर्भाव बच्चों …

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